थिंक एंड ग्रो रिच – अध्याय 8: निर्णय (Decision) — टालमटोल पर विजय और संकल्प की शक्ति
1. प्रस्तावना: निर्णय की अनुपस्थिति ही पराजय की जननी है
नेपोलियन हिल की विश्वप्रसिद्ध पुस्तक Think and Grow Rich के आठवें अध्याय का शीर्षक है—"DECISION: The Mastery of Procrastination (The Seventh Step toward Riches)"।
पच्चीस हज़ार से अधिक असफल व्यक्तियों के गहन विश्लेषण के बाद हिल ने पाया कि "निर्णय की कमी" (Lack of Decision) असफलता के तीस प्रमुख कारणों में लगभग शीर्ष पर आती है। संसार में अधिकांश लोग असफल इसलिए नहीं होते कि उनमें प्रतिभा या साधन नहीं होते; वे इसलिए असफल होते हैं क्योंकि वे कभी यह स्पष्ट निश्चय ही नहीं कर पाते कि उन्हें जीवन से क्या चाहिए। टालमटोल (Procrastination) और अनिर्णय (Indecision) सगे जुड़वां भाई हैं, और जब तक मनुष्य इन दोनों का दमन नहीं करता, तब तक वह सफलता की राह पर पहला ठोस कदम नहीं उठा सकता।
2. शृंखला से जुड़ाव: अध्याय 1 से 7 तक की कड़ियाँ
हमारी इस निरंतर शृंखला में प्रत्येक अध्याय अगले कदम की नींव तैयार करता है:
अध्याय 1:
— विचारों की भौतिक शक्ति और एडविन सी. बार्न्स का अटूट संकल्प।विचार ही वस्तु हैं (Thoughts Are Things) अध्याय 2:
— पीछे हटने के सारे रास्ते जलाकर लक्ष्य पर टिके रहने का सिद्धांत।तीव्र इच्छा (Desire – Starting Point of Achievement) अध्याय 3:
— विचारों को विश्वास और गहरी भावना से चुंबकीय बनाना।विश्वास (Faith – The Head Chemist of Mind) अध्याय 4:
— चेतन पहरेदार द्वारा अवचेतन मन की प्रोग्रामिंग का विज्ञान।आत्म-सुझाव (Auto-Suggestion – Subconscious Programming) अध्याय 5:
— ज्ञान को संगठित कार्ययोजना में पिरोकर शक्ति में बदलना।विशिष्ट ज्ञान (Specialized Knowledge) अध्याय 6:
— विचारों को मानसिक खाके और व्यावसायिक योजनाओं में ढालने की कला।कल्पना (Imagination – The Workshop of Mind) अध्याय 7:
— मास्टर माइंड और कार्ययोजना से अस्थायी पराजय को विजय में बदलना।संगठित योजना (Organized Planning)
अब हम पहुँच चुके हैं अध्याय 8: निर्णय (Decision) पर, जो यह सुनिश्चित करता है कि आपकी बनाई योजनाएं टालमटोल की भेंट न चढ़ें।
3. दार्शनिक आधार: अनिर्णय और टालमटोल का जाल
दार्शनिक दृष्टि से अनिर्णय मनुष्य के अंतर्मन का छुपा हुआ भय है। जब कोई व्यक्ति निर्णय लेने से बचता है, तो वह वास्तव में जिम्मेदारी और संभावित आलोचना से बचने का प्रयास कर रहा होता है।
अनिर्णय की यह घातक आदत बचपन और स्कूल-कॉलेज के दिनों से शुरू होती है। पारंपरिक शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों को सूचनाएं रटना तो सिखाती है, किंतु उन्हें त्वरित और दृढ़ निर्णय लेने का प्रशिक्षण नहीं देती। परिणामस्वरूप, सौ में से अठानवे लोग वही पहली नौकरी स्वीकार कर लेते हैं जो उन्हें अनायास मिल जाती है, क्योंकि उनमें यह तय करने का साहस नहीं होता कि उन्हें कौन सा पद और कौन सा नियोक्ता चाहिए।
4. सफल बनाम असफल लोगों की आदत: त्वरित निर्णय और धीमा बदलाव
सैकड़ों करोड़पतियों और असाधारण रूप से सफल व्यक्तियों के जीवन का अध्ययन करने के बाद नेपोलियन हिल ने यह अचूक सत्य उजागर किया:
सफल व्यक्ति: निर्णय बहुत शीघ्रता (Promptly) और दृढ़ता से लेते हैं, और यदि बदलते भी हैं तो अत्यंत धीमी गति से और ठोस कारणों के आधार पर ही बदलते हैं।
असफल व्यक्ति: निर्णय लेने में बहुत लंबा समय लगाते हैं (यदि ले भी पाएं), किंतु उसे बहुत जल्दी-जल्दी और बिना सोचे-समझे बदल देते हैं।
5. हेनरी फोर्ड का मॉडल "T" और दृढ़ निश्चय का रहस्य
हेनरी फोर्ड के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता थी—तुरंत निर्णय लेना और उस पर चट्टान की तरह अडिग रहना।
जब उन्होंने अपनी मशहूर मॉडल "T" कार बनाई, तो उनके सभी सलाहकारों, इंजीनियरों और ग्राहकों ने उस डिज़ाइन को बदलने का भारी दबाव डाला। किंतु फोर्ड अपने निर्णय पर अडिग रहे। कुछ लोगों ने इसे उनका हठीलापन कहा, किंतु इसी दृढ़ निर्णय के बल पर फोर्ड ने डिज़ाइन बदलने से पूर्व अकूत संपत्ति और वैश्विक बाज़ार पर एकाधिकार अर्जित किया। हिल लिखते हैं कि डगमगाने की तुलना में निर्णय पर थोड़ा हठी होना भी कहीं अधिक श्रेयस्कर है।
6. दूसरों की राय (Opinions) का सस्ता बाज़ार: कान खुले, मुँह बंद
संसार में सबसे सस्ती और प्रचुर वस्तु है—दूसरों की राय (Opinions)। हर व्यक्ति के पास मुफ्त की सलाह का अंबार लगा हुआ है।
"अपने कान और आँखें खुली रखें, परंतु अपना मुँह बंद रखें! दुनिया को यह मत बताइए कि आप क्या करने जा रहे हैं; पहले उसे करके दिखाइए!"
जो लोग केवल बोलते रहते हैं, वे वास्तव में बहुत कम काम करते हैं। जब आप अपनी योजनाओं की घोषणा हर किसी के सामने करते हैं, तो आप न केवल अपने विचार चुराए जाने का जोखिम उठाते हैं, बल्कि ईर्ष्यालु और संशयवादी लोगों को अपनी राह में बाधाएं खड़ी करने का अवसर भी दे देते हैं।
7. ऐतिहासिक दृष्टांत: 4 जुलाई 1776 और 56 महापुरुषों का फैसला
निर्णय की महानता इस बात से आंकी जाती है कि उसे लेने में कितना साहस दांव पर लगा था। नेपोलियन हिल अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी घटना का उल्लेख करते हैं—स्वतंत्रता की घोषणा (Declaration of Independence):
5 मार्च 1770 को बोस्टन में हुए संघर्ष के बाद सैमुअल एडम्स और जॉन हैनकॉक्स ने ब्रिटिश सेना को निष्कासित करने का दृढ़ निर्णय लिया।
एडम्स ने एक गुप्त बैठक में दरवाज़ा बंद करके चाबी जेब में रख ली और घोषणा की कि जब तक महाद्वीपीय कांग्रेस आयोजित करने का निर्णय नहीं हो जाता, तब तक कोई इस कमरे से बाहर नहीं जाएगा।
अंततः 4 जुलाई 1776 को छप्पन व्यक्तियों ने स्वतंत्रता के ऐतिहासिक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए। वे सभी भली-भांति जानते थे कि यदि यह क्रांति असफल हुई, तो ब्रिटिश हुकूमत उन सभी को देशद्रोह के आरोप में फांसी पर चढ़ा देगी; फिर भी उन्होंने वह साहसिक निर्णय लिया।
8. दैनिक जीवन में दृढ़ निर्णय लेने के 4 नियम
स्वयं निर्णय लें: आवश्यक तथ्य और जानकारी शांति से जुटाएं तथा अपना निर्णय स्वयं लें।
गोपनीयता बनाए रखें: अपनी योजनाओं की चर्चा केवल अपने विश्वसनीय मास्टर माइंड समूह के साथ करें।
तात्कालिकता का अभ्यास करें: रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कार्यों में हिचकिचाहट और टालमटोल बंद करें, जिससे बड़े निर्णय लेना स्वाभाविक आदत बन जाए।
जोखिम उठाने का साहस रखें: जीवन से बड़ी सफलता और आर्थिक स्वतंत्रता की मांग वही कर सकता है जो अपने निर्णय पर दृढ़ रहने का साहस दिखाता है।
9. दार्शनिक निष्कर्ष और आज का संकल्प
संसार हमेशा उस व्यक्ति के लिए रास्ता छोड़ देता है जिसके शब्दों और कदमों से यह साफ झलकता है कि वह कहाँ जा रहा है।
अनिर्णय और संशय के आवरण को आज ही उतार फेंकिए। अपना स्पष्ट लक्ष्य चुनिए, उस पर दृढ़ निर्णय लीजिए और अपने संकल्प को तत्काल कर्म में बदल दीजिए।
"संसार उस व्यक्ति के आगे झुक जाता है जो जानता है कि वह क्या चाहता है और जिसे यह पक्का विश्वास है कि वह उसे हासिल करके ही रहेगा।"
